पश्चिम एशिया संकट के बीच भारत के लिए राहत की खबर। यूरिया, डीएपी और सल्फर से लदे 15 जहाज सुरक्षित होर्मुज स्ट्रेट पार कर भारत आ रहे हैं। जानिए सरकार ने उर्वरकों की उपलब्धता को लेकर क्या कहा।
By : Admin User | Updated at : 06 Jul 2026, 01:29 pm (IST)
पश्चिम एशिया में जारी तनाव और वैश्विक सप्लाई चेन पर उसके असर के बीच भारत के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय ने जानकारी दी है कि उर्वरक और कच्चा माल लेकर आने वाले 15 जहाज सुरक्षित रूप से होर्मुज स्ट्रेट पार कर चुके हैं और अब भारत की ओर बढ़ रहे हैं। सरकार का कहना है कि किसानों को उर्वरकों की कमी न हो, इसके लिए सभी आवश्यक कदम उठाए गए हैं।
15 जहाजों में यूरिया, डीएपी और सल्फर की बड़ी खेप
• 8 जहाजों में 3.32 लाख मीट्रिक टन यूरिया
• 4 जहाजों में 2.57 लाख मीट्रिक टन डीएपी (डाइअमोनियम फॉस्फेट)
• 3 जहाजों में 1.11 लाख मीट्रिक टन सल्फर
इसके अलावा 5 और जहाज जल्द ही भारत के लिए रवाना होने वाले हैं, जिससे आने वाले महीनों में उर्वरकों की आपूर्ति और मजबूत होने की उम्मीद है।
सरकार ने किसानों को दिया भरोसा
केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित हुई है। इसका असर उर्वरकों की कीमतों और शिपमेंट के समय पर भी पड़ा है। उन्होंने बताया कि विदेशों में स्थित भारतीय मिशनों ने नए वैश्विक उत्पादकों और सप्लायरों से संपर्क स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई
राज्यों के साथ लगातार समन्वय
मंत्रालय ने बताया कि उर्वरक विभाग सभी राज्य सरकारों के साथ लगातार समन्वय बनाए हुए है, ताकि देशभर में उर्वरकों का संतुलित और पारदर्शी वितरण सुनिश्चित किया जा सके। सरकार का कहना है कि खरीफ सीजन के दौरान किसानों को किसी भी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए उपलब्ध स्टॉक और नई खेपों की निगरानी लगातार की जा रही है।
गैस सप्लाई भी पूरी तरह बहाल
सरकार ने यह भी जानकारी दी कि उर्वरक संयंत्रों को मिलने वाली प्राकृतिक गैस की आपूर्ति, जो कुछ समय पहले घटकर लगभग 65 प्रतिशत रह गई थी, अब 100 प्रतिशत बहाल हो चुकी है। इससे घरेलू उत्पादन में तेजी आने की उम्मीद है और आयात पर दबाव भी कम होगा।
देश में आधे साल से अधिक की जरूरत के बराबर स्टॉक
रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के मुताबिक देश में फिलहाल 197.56 लाख मीट्रिक टन उर्वरकों का स्टॉक उपलब्ध है। यह भारत की 383.9 लाख मीट्रिक टन वार्षिक आवश्यकता का 51 प्रतिशत से अधिक है। मंत्रालय का कहना है कि आयात और घरेलू उत्पादन दोनों मोर्चों पर किए गए प्रयासों की वजह से देशभर में उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता बनी हुई है और फिलहाल किसी बड़े संकट की आशंका नहीं है।
किसानों के लिए राहत
खरीफ फसलों की बुवाई के दौरान उर्वरकों की मांग सबसे अधिक रहती है। ऐसे समय में होर्मुज स्ट्रेट से उर्वरक लेकर आने वाले जहाजों का सुरक्षित भारत पहुंचना किसानों और कृषि क्षेत्र के लिए राहत भरी खबर माना जा रहा है। सरकार ने भरोसा दिलाया है कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां चाहे जैसी भी हों, किसानों की जरूरतों को प्राथमिकता दी जाएगी और देश में उर्वरकों की आपूर्ति बाधित नहीं होने दी जाएगी।
Published at : 06 Jul 2026, 01:29 pm (IST)
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