सुनवाई के दौरान पुलिस की कार्रवाई और प्रदर्शनकारियों के साथ कथित व्यवहार को लेकर कई गंभीर मुद्दे सामने आए। दिया। मुख्य न्यायाधीश ने संकेत दिया कि मामले की पड़ताल के लिए उच्च स्तरीय समिति या SIT गठित की जा सकती है।
By : Admin User | Updated at : 28 Jul 2026, 01:02 pm (IST)
CJP प्रदर्शन और संसद मार्च से जुड़े मामलों पर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। अदालत ने केंद्र समेत सात राज्यों को नोटिस जारी करते हुए प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज FIR पर फिलहाल किसी भी तरह की दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगा दी। याचिकाकर्ताओं ने बताया कि दिल्ली के अलावा मध्य प्रदेश, नागपुर और बिहार में भी पुलिस कार्रवाई के आरोप सामने आए हैं।
सुनवाई में पैलेट गन और इलेक्ट्रिक बैटन के इस्तेमाल, नाबालिगों की हिरासत, सिविल ड्रेस में पुलिसकर्मियों की कथित हिंसा और वकीलों व पत्रकारों पर हमले जैसे मुद्दे उठे। कोर्ट के सामने एक 19 वर्षीय युवक की आंखों की रोशनी जाने और एक घायल युवती के ICU में भर्ती होने का भी जिक्र किया गया।
पुलिस कार्रवाई पर उठे सवाल
वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायणन ने एक वीडियो का हवाला देते हुए पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाए। उनके मुताबिक, वीडियो में एक सहायक उप निरीक्षक कथित तौर पर कार के शीशे तोड़ता नजर आ रहा है। वहीं, वकील शादान फरासत ने आरोप लगाया कि कुछ पुलिसकर्मी वर्दी में होने के बावजूद नेम प्लेट नहीं लगाए हुए थे।
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि शुरुआती तौर पर प्रदर्शन शांतिपूर्ण छात्र आंदोलन के रूप में सामने आया। हालांकि, अदालत ने यह भी माना कि ऐसे प्रदर्शनों में कुछ बाहरी लोग अपने एजेंडे के साथ शामिल हो सकते हैं।
बिहार में नाबालिगों की हिरासत का मुद्दा
बिहार मामले में दावा किया गया कि 140 से ज्यादा लोग हिरासत में हैं, जिनमें कई नाबालिग शामिल हैं। याचिकाकर्ताओं ने करीब 13 साल के बच्चे समेत किशोरों को 40 घंटे से अधिक समय बाद मजिस्ट्रेट के सामने पेश किए जाने का आरोप लगाया।
सुप्रीम कोर्ट ने पूरे मामले की स्वतंत्र जांच की जरूरत बताई है। कोर्ट की ओर से मामले की जांच के लिए SIT या उच्च स्तरीय समिति बनाए जाने के संकेत दिए गए हैं। अब केंद्र और सात राज्यों के जवाब के बाद आगे की कार्रवाई तय होगी।
Published at : 28 Jul 2026, 01:02 pm (IST)
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