सीबीआई ने EPFO को कथित तौर पर ₹1,816 करोड़ का नुकसान पहुंचाने के मामले में अनिल अंबानी और रिलायंस कैपिटल के खिलाफ FIR दर्ज की है। मामला NCD निवेश, कथित धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश से जुड़ा है। अनिल अंबानी ने सभी आरोपों से इनकार किया है।
By : Admin User | Updated at : 02 Aug 2026, 01:07 pm (IST)
केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) को कथित तौर पर ₹1,816.22 करोड़ का नुकसान पहुंचाने के मामले में अनिल अंबानी और रिलायंस कैपिटल लिमिटेड (RCL) के खिलाफ FIR दर्ज की है। यह कार्रवाई केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्रालय की शिकायत के आधार पर की गई है, जिसमें धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और EPFO के निवेश को नुकसान पहुंचाने के आरोप लगाए गए हैं। हालांकि, अनिल अंबानी ने अपने प्रवक्ता के माध्यम से इन सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि उन्होंने कोई गलत काम नहीं किया और कानून के तहत अपने सभी अधिकार सुरक्षित रखेंगे।
क्या है पूरा मामला?
श्रम मंत्रालय के अनुसार, रिलायंस कैपिटल ने 2013 और 2014 में सुरक्षित नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर (NCD) जारी किए थे। बाद में पोर्टफोलियो मैनेजरों ने EPFO के फंड से इन डिबेंचरों में लगभग ₹2,500 करोड़ का निवेश किया। ये निवेश क्रमशः 2023 और 2024 में परिपक्व (मैच्योर) होने वाले थे। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि इन निवेशों के कारण EPFO को ₹1,816.22 करोड़ का वित्तीय नुकसान हुआ।
ED की जानकारी के बाद दर्ज हुई शिकायत
श्रम मंत्रालय का कहना है कि यह शिकायत प्रवर्तन निदेशालय (ED) से मिली जानकारी और BDO इंडिया LLP की जांच में सामने आए दस्तावेजों के आधार पर दर्ज की गई। आरोप है कि वर्ष 2019 से 2021 के बीच हुए कुछ वित्तीय लेन-देन प्रथम दृष्टया धोखाधड़ी और फंड के कथित दुरुपयोग की ओर संकेत करते हैं। शिकायत में यह भी कहा गया है कि कंपनी के फंड की कथित हेराफेरी, अनियमित ऋण वितरण, सुरक्षा में कमी और अन्य वित्तीय अनियमितताओं ने रिलायंस कैपिटल की वित्तीय स्थिति को कमजोर किया, जिससे डिबेंचर धारकों के प्रति दायित्व निभाना मुश्किल हो गया।
CBI करेगी विस्तृत जांच
CBI अब इस मामले में दस्तावेजों, वित्तीय लेन-देन और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच करेगी। एजेंसी यह पता लगाएगी कि क्या निवेश प्रक्रिया में नियमों का उल्लंघन हुआ और क्या किसी आपराधिक साजिश के तहत EPFO के फंड को नुकसान पहुंचाया गया। FIR दर्ज होने के बाद अनिल अंबानी के प्रवक्ता ने बयान जारी कर कहा कि यह मामला रिलायंस कैपिटल लिमिटेड से संबंधित है। उन्होंने बताया कि अनिल अंबानी वर्ष 2005 से नवंबर
2021 तक कंपनी के गैर-कार्यकारी निदेशक (Non-Executive Director) और बोर्ड के अध्यक्ष रहे। नवंबर 2021 में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने कंपनी का बोर्ड भंग कर प्रशासक नियुक्त किया था। प्रवक्ता ने कहा कि अनिल अंबानी किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या धोखाधड़ी से इनकार करते हैं और वे कानूनी प्रक्रिया के तहत अपना पक्ष मजबूती से रखेंगे।
जांच के नतीजों पर रहेगी नजर
फिलहाल CBI ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। एजेंसी की जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि EPFO को हुए कथित नुकसान के लिए कौन जिम्मेदार है और क्या आरोपों के समर्थन में पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं। मामले पर उद्योग जगत और वित्तीय क्षेत्र की भी नजर बनी हुई है।
Published at : 02 Aug 2026, 01:07 pm (IST)