21 जुलाई से 23 जुलाई के बीच इस सिस्टम ने हजारों ऐसे लोगों की पहचान की, जिनका आपराधिक बैकग्राउंड रहा है। पुलिस का दावा है कि हिंसा के दौरान भीड़ में शामिल कुछ लोगों ने पुलिसकर्मियों और सुरक्षा बलों पर चाकू तथा अन्य धारदार हथियारों से हमला किया था।
By : Admin User | Updated at : 25 Jul 2026, 01:03 pm (IST)
दिल्ली के जंतर-मंतर पर जारी सीजेपी (कॉकरोच जनता पार्टी) के प्रदर्शन के बीच 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान हुई हिंसा को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, हिंसा के बाद विरोध स्थल पर लगाए गए फेसियल रिकग्निशन सिस्टम (FRS) ने पिछले तीन दिनों में 2,500 से अधिक ऐसे लोगों की पहचान की है, जिनका आपराधिक रिकॉर्ड पहले से पुलिस के डेटाबेस में दर्ज है।
पुलिस के अनुसार, 20 जुलाई को हुई झड़प के बाद सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए जंतर-मंतर पर FRS तैनात किया गया था। 21 जुलाई से 23 जुलाई के बीच इस सिस्टम ने हजारों ऐसे लोगों की पहचान की, जिनका आपराधिक बैकग्राउंड रहा है। पुलिस का दावा है कि हिंसा के दौरान भीड़ में शामिल कुछ लोगों ने पुलिसकर्मियों और सुरक्षा बलों पर चाकू तथा अन्य धारदार हथियारों से हमला किया था।
जानकारी के मुताबिक, जंतर-मंतर के विरोध स्थल के मुख्य एंट्री और एग्जिट पॉइंट्स पर फेसियल रिकग्निशन सिस्टम (FRS) की चार यूनिट लगाई गई हैं। यह सिस्टम सीधे दिल्ली पुलिस के डेटाबेस से जुड़ा है और रियल-टाइम में लोगों की पहचान का मिलान करता है। इससे वांछित और आदतन अपराधियों की तुरंत पहचान कर उनकी जानकारी सत्यापित की जा सकती है।
पुलिस ने बताया कि हिंसा के मामले में अब तक 15 एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं और जांच लगातार जारी है। वहीं, दूसरी ओर सीजेपी और सरकार के बीच बातचीत का दौर भी जारी है, लेकिन अभी तक किसी ठोस सहमति की घोषणा नहीं हुई है। पुलिस का कहना है कि हिंसा में शामिल सभी लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
Published at : 25 Jul 2026, 01:03 pm (IST)