इजरायल की रक्षा कंपनी राफेल भारत में आयरन डोम इंटरसेप्टर मिसाइलों की प्रोडक्शन लाइन लगाने की तैयारी में है। 'मेक इन इंडिया' के तहत यह कदम भारत को वैश्विक रक्षा उत्पादन और निर्यात का बड़ा केंद्र बना सकता है। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।
By : Admin User | Updated at : 10 Jul 2026, 11:40 am (IST)
भारत के रक्षा क्षेत्र के लिए एक बड़ा और रणनीतिक बदलाव देखने को मिल सकता है। इजरायल की अग्रणी रक्षा कंपनी राफेल एडवांस्ड डिफेंस सिस्टम्स (Rafael Advanced Defense Systems) भारत में आयरन डोम इंटरसेप्टर मिसाइलों की प्रोडक्शन लाइन स्थापित करने की संभावनाओं पर काम कर रही है। इसके लिए कंपनी कई भारतीय रक्षा कंपनियों के साथ शुरुआती स्तर की बातचीत कर रही है।
यदि यह परियोजना अंतिम रूप लेती है, तो भारत पहली बार इजरायल और अमेरिका के बाहर आयरन डोम इंटरसेप्टर मिसाइलों का निर्माण करने वाला तीसरा देश बन जाएगा। इसे भारत सरकार की 'मेक इन इंडिया' और 'आत्मनिर्भर भारत' पहल के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
भारत बनेगा वैश्विक रक्षा उत्पादन का नया केंद्र
केंद्र सरकार पिछले कुछ वर्षों से विदेशी रक्षा कंपनियों को भारत में उत्पादन करने और यहां से वैश्विक बाजारों तक निर्यात करने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। इसी रणनीति के तहत आयरन डोम इंटरसेप्टर का स्थानीय उत्पादन भारत को रक्षा निर्माण के क्षेत्र में नई पहचान दिला सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे देश की रक्षा उत्पादन क्षमता बढ़ेगी, रोजगार के अवसर पैदा होंगे और भारत वैश्विक रक्षा आपूर्ति श्रृंखला (Global Defence Supply Chain) में अपनी भूमिका और मजबूत कर सकेगा।
अभी कहां बनती हैं आयरन डोम मिसाइलें?
फिलहाल आयरन डोम इंटरसेप्टर मिसाइलों का निर्माण उत्तरी इजरायल में किया जाता है। इसके अलावा अमेरिका में रक्षा कंपनी रेथियॉन (Raytheon) के साथ साझेदारी में भी इनका उत्पादन होता है। अगर भारत में नई प्रोडक्शन लाइन स्थापित होती है, तो इससे उत्पादन क्षमता बढ़ेगी, लागत कम होगी और वैश्विक मांग के अनुसार तेजी से आपूर्ति करना संभव हो सकेगा।
भारत-इजरायल रक्षा साझेदारी पहले से मजबूत
भारत और इजरायल के बीच रक्षा सहयोग लंबे समय से मजबूत रहा है। दोनों देशों ने मिलकर बराक-8 (Barak-8) लॉन्ग रेंज सरफेस-टू-एयर मिसाइल सिस्टम विकसित किया है, जो भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना की महत्वपूर्ण रक्षा प्रणाली का हिस्सा है। इसके अलावा दोनों देश कई रक्षा तकनीकों, निगरानी प्रणालियों और आधुनिक हथियारों के विकास में भी सहयोग कर रहे हैं।
बढ़ती वैश्विक मांग के बीच बड़ा रणनीतिक कदम
पश्चिम एशिया में हालिया संघर्षों के बाद दुनिया भर में आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम की मांग तेजी से बढ़ी है। ऐसे माहौल में भारत में आयरन डोम इंटरसेप्टर का निर्माण राफेल के लिए भी रणनीतिक रूप से लाभदायक साबित हो सकता है। भारत में निर्माण होने पर कंपनी घरेलू जरूरतों के साथ-साथ अन्य मित्र देशों को भी इन इंटरसेप्टर मिसाइलों का निर्यात कर सकेगी। इससे भारत का रक्षा निर्यात भी नई ऊंचाइयों तक पहुंच सकता है।
'सुदर्शन चक्र' परियोजना को भी मिल सकती है गति
इसी दौरान भारत स्वदेशी एयर डिफेंस सिस्टम 'सुदर्शन चक्र' के विकास पर भी तेजी से काम कर रहा है, जिसे आयरन डोम जैसी बहुस्तरीय सुरक्षा प्रणाली के रूप में विकसित करने की योजना है। यदि राफेल के साथ यह साझेदारी आगे बढ़ती है, तो भारतीय रक्षा उद्योग को अत्याधुनिक तकनीक, आधुनिक उत्पादन क्षमता और वैश्विक निर्यात के नए अवसर मिल सकते हैं।
आगे क्या?
हालांकि अभी इस परियोजना पर अंतिम समझौता नहीं हुआ है, लेकिन बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है। यदि सभी प्रक्रियाएं पूरी होती हैं, तो भारत केवल इजरायली एयर डिफेंस सिस्टम का खरीदार नहीं रहेगा, बल्कि उसके निर्माण, तकनीकी सहयोग और वैश्विक आपूर्ति नेटवर्क का भी अहम हिस्सा बन जाएगा।