भारत सरकार ने 12% से अधिक अल्कोहल वाली ओरल दवाओं को Schedule H1 के दायरे में लाकर उनके बिना डॉक्टर की पर्ची बिक्री पर रोक लगा दी है। जानिए नए नियम का उद्देश्य, किन दवाओं पर होगा असर और क्या हैं नए प्रावधान।
By : Admin User | Updated at : 10 Jul 2026, 12:20 pm (IST)
अगर आप मेडिकल स्टोर से बिना डॉक्टर की सलाह के कफ सिरप या अन्य अल्कोहल युक्त दवाएं खरीदते हैं, तो अब ऐसा करना आसान नहीं होगा। केंद्र सरकार ने 12 प्रतिशत से अधिक अल्कोहल वाली ओरल दवाओं की बिक्री को लेकर नियमों में बड़ा बदलाव किया है। नए प्रावधानों के तहत ऐसी दवाओं को Schedule H1 श्रेणी में शामिल कर दिया गया है। इसका मतलब है कि अब इन दवाओं की खरीद केवल डॉक्टर के वैध प्रिस्क्रिप्शन पर ही संभव होगी।
सरकार के इस फैसले का असर उन दवाओं पर पड़ेगा जिनमें 12 प्रतिशत से अधिक अल्कोहल होता है और जिन्हें 30 मिलीलीटर से बड़े पैक में बेचा जाता है। इनमें कुछ कफ सिरप, टॉनिक और अन्य लिक्विड दवाएं शामिल हो सकती हैं। पहले कई लोग बिना किसी पर्चे के मेडिकल स्टोर से ऐसी दवाएं आसानी से खरीद लेते थे, लेकिन अब मेडिकल स्टोर संचालक बिना प्रिस्क्रिप्शन दवा नहीं बेच सकेंगे।
इतना ही नहीं, Schedule H1 के नियमों के तहत मेडिकल स्टोर को प्रत्येक बिक्री का रिकॉर्ड भी रखना होगा। इसमें मरीज का विवरण, डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन की जानकारी और बिक्री का पूरा ब्योरा सुरक्षित रखना अनिवार्य होगा। नियमों का उल्लंघन करने पर संबंधित दुकानदार के खिलाफ कार्रवाई भी की जा सकती है।
सरकार का कहना है कि यह फैसला अल्कोहल युक्त दवाओं के दुरुपयोग को रोकने के लिए लिया गया है। पिछले कुछ वर्षों में कई राज्यों से कोडीन और अल्कोहल युक्त कफ सिरप के नशे के लिए इस्तेमाल और उनकी अवैध तस्करी के मामले सामने आए थे। इसके अलावा, कुछ मामलों में दवाओं के गलत उपयोग से बच्चों की मौत की घटनाओं ने भी चिंता बढ़ाई थी।
इस नियम का मसौदा अक्टूबर 2025 में सार्वजनिक किया गया था और लोगों से सुझाव भी मांगे गए थे। निर्धारित अवधि में कोई बड़ी आपत्ति सामने नहीं आने के बाद दवा तकनीकी सलाहकार बोर्ड की सिफारिशों के आधार पर इसे अंतिम रूप दिया गया।
Schedule H1 भारत के ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के तहत ऐसी दवाओं की श्रेणी है, जिनकी बिक्री और उपयोग पर विशेष निगरानी रखी जाती है। इस श्रेणी में आने वाली दवाएं केवल डॉक्टर की पर्ची पर ही दी जा सकती हैं और उनकी बिक्री का रिकॉर्ड रखना अनिवार्य होता है।
सरकार का मानना है कि नए नियम से दवाओं के दुरुपयोग, नशे के लिए इनके इस्तेमाल और अवैध कारोबार पर रोक लगाने में मदद मिलेगी। वहीं मरीजों को भी बिना चिकित्सकीय सलाह के ऐसी दवाओं का सेवन करने से बचाया जा सकेगा। अब यदि किसी व्यक्ति को 12 प्रतिशत से अधिक अल्कोहल वाली ओरल दवा की आवश्यकता होगी, तो उसे पहले डॉक्टर से परामर्श लेना और वैध प्रिस्क्रिप्शन प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा।
Published at : 10 Jul 2026, 12:20 pm (IST)