सुनवाई के दौरान उसने कथित तौर पर जजों से कहा कि वे लखनऊ के एएसपी के खिलाफ साइबर अपराध से जुड़े मामले में FIR दर्ज करने का आदेश दें। हालात बिगड़ने पर सुप्रीम कोर्ट के सुरक्षाकर्मियों ने हस्तक्षेप किया और प्रबल प्रताप को कोर्ट रूम से बाहर ले गए।
By : Admin User | Updated at : 11 Jul 2026, 08:36 pm (IST)
सुप्रीम कोर्ट में एक सुनवाई के दौरान उस समय हाई वोल्टेज ड्रामा देखने को मिला, जब एक याचिकाकर्ता और वकील प्रबल प्रताप ने अदालत में असामान्य व्यवहार किया। बताया गया कि मामले की पैरवी खुद कर रहे प्रबल प्रताप ने पहले पीठ के सामने मौजूद न्यायाधीशों को 'न्यायिक सेवक' कहकर संबोधित किया और इसके बाद अदालत को निर्देश देने की कोशिश की।
सुनवाई के दौरान उसने कथित तौर पर जजों से कहा कि वे लखनऊ के एएसपी के खिलाफ साइबर अपराध से जुड़े मामले में FIR दर्ज करने का आदेश दें। उसके इस रवैये पर जस्टिस केवी विश्वनाथन ने सवाल उठाया कि क्या वह अदालत और न्यायाधीशों को आदेश दे रहा है। इसके बाद स्थिति और तनावपूर्ण हो गई। आरोप है कि प्रबल प्रताप ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत के खिलाफ अपशब्दों का इस्तेमाल किया और कोर्टरूम में मौजूद कागजात हवा में उछाल दिए। अचानक हुए इस घटनाक्रम से अदालत में मौजूद वकील और अन्य लोग हैरान रह गए।
हालात बिगड़ने पर सुप्रीम कोर्ट के सुरक्षाकर्मियों ने हस्तक्षेप किया और प्रबल प्रताप को कोर्टरूम से बाहर ले गए। कुछ समय तक उसे अदालत परिसर में DSP कार्यालय में रखा गया। इसके बाद यह सवाल उठने लगा कि क्या उसके खिलाफ FIR दर्ज होगी या अदालत की अवमानना की कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने उसके खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई शुरू नहीं करने का फैसला किया। जस्टिस केवी विश्वनाथन ने कहा कि याचिकाकर्ता काफी परेशान नजर आ रहा था और उसका व्यवहार उसकी निराशा का परिणाम हो सकता है। अदालत ने उसके प्रति सहानुभूति जताते हुए अवमानना या अन्य कार्रवाई नहीं करने का निर्णय लिया।
यह पूरा विवाद उस मामले की सुनवाई के दौरान हुआ, जिसमें प्रबल प्रताप ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। मामला लखनऊ के एक आदेश से जुड़ा था, जिसमें पुलिस को सीधे FIR दर्ज करने के निर्देश देने की मांग की गई थी। निचली अदालत ने इसे निजी शिकायत के रूप में आगे बढ़ाने का निर्देश दिया था।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उसकी याचिका खारिज कर दी थी, जिसके बाद वह सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। सुप्रीम कोर्ट ने रिकॉर्ड और मामले की परिस्थितियों को देखने के बाद हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए उसकी विशेष अनुमति याचिका (SLP) भी खारिज कर दी। हालांकि कोर्टरूम में हुए इस घटनाक्रम ने न्यायपालिका में व्यवहार, मर्यादा और अदालत की गरिमा को लेकर एक बार फिर चर्चा छेड़ दी है।
Published at : 11 Jul 2026, 01:45 pm (IST)
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