याचिका के अनुसार, ट्रंप प्रशासन ने ये टैरिफ ट्रेड एक्ट 1974 की धारा 301 के तहत लागू किए हैं। प्रशासन का तर्क है कि यह कदम उन देशों के खिलाफ उठाया गया है जो जबरन श्रम (Forced Labor) से बने उत्पादों के निर्यात को रोकने के लिए पर्याप्त कार्रवाई नहीं कर रहे हैं
By : Admin User | Updated at : 04 Aug 2026, 11:42 am (IST)
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नई टैरिफ नीति एक बार फिर कानूनी विवादों में घिर गई है। भारत समेत 60 देशों से आयात होने वाले उत्पादों पर लगाए गए नए शुल्क के खिलाफ अमेरिका के 25 डेमोक्रेटिक शासित राज्यों ने न्यूयॉर्क स्थित यूएस कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड में याचिका दायर की है। राज्यों ने 10 से 12.5 प्रतिशत तक के आयात शुल्क को कानून के दायरे से बाहर बताया है।
ट्रंप प्रशासन का कहना है कि ये टैरिफ उन देशों पर लगाए गए हैं जो जबरन श्रम से जुड़े उत्पादों पर पर्याप्त कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। वहीं, याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि सरकार पहले रद्द किए जा चुके टैरिफ को नए कानूनी आधार के जरिए दोबारा लागू करना चाहती है।
24 जुलाई को घोषित इस नीति के तहत भारत, यूरोपीय संघ समेत 60 देशों पर अतिरिक्त शुल्क लगाया गया था। हालांकि, एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी के मुताबिक भारत पर प्रस्तावित 12.5 प्रतिशत टैरिफ घटाकर 10 प्रतिशत कर दिया गया है।
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट यह स्पष्ट कर चुका है कि इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) राष्ट्रपति को पूरी दुनिया पर व्यापक टैरिफ लगाने का असीमित अधिकार नहीं देता। इसके बाद ट्रंप प्रशासन ने ट्रेड एक्ट 1974 की धारा 122 के तहत अस्थायी वैश्विक टैरिफ लागू किए थे, लेकिन यूएस कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड ने उन्हें भी अवैध करार दिया था। ऐसे में ट्रंप की नई टैरिफ नीति पर शुरू हुई यह कानूनी चुनौती भविष्य में अमेरिकी व्यापार नीति और अंतरराष्ट्रीय कारोबारी संबंधों पर महत्वपूर्ण असर डाल सकती है
Published at : 04 Aug 2026, 11:40 am (IST)