अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों को स्थिर रखने के फैसले और भविष्य की मौद्रिक नीति को लेकर बदलती उम्मीदों ने भी सोने की कीमतों पर दबाव बनाया है। इसके अलावा अमेरिका-ईरान तनाव, तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और वैश्विक महंगाई को लेकर बनी अनिश्चितता भी बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा रही है।
By : Admin User | Updated at : 04 Aug 2026, 03:17 pm (IST)
सोने की कीमतों को लेकर वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (WGC) ने नया अनुमान जारी किया है, जिसमें आने वाले समय में कीमतों में बड़ी गिरावट की आशंका जताई गई है। रिपोर्ट के अनुसार, यदि सोने का भाव 3,857 अमेरिकी डॉलर प्रति औंस से नीचे फिसलता है, तो अगला प्रमुख सपोर्ट लेवल 3,500 डॉलर प्रति औंस हो सकता है। यह स्तर जनवरी के उच्चतम स्तर की तुलना में करीब 37 प्रतिशत की गिरावट को दर्शाता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि सोने में पहले भी इस तरह की बड़ी गिरावट देखने को मिली है
और मौजूदा तकनीकी संकेत उसी दिशा की ओर इशारा कर रहे हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जापानी येन मजबूत होता है और अमेरिकी डॉलर कमजोर पड़ता है, तो इससे सोने की कीमतों को कुछ राहत मिल सकती है। रिपोर्ट जारी होने के समय अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने का भाव करीब 4,063.80 डॉलर प्रति औंस था। वहीं, लंदन बुलियन मार्केट एसोसिएशन (LBMA) का गोल्ड प्राइस पीएम पिछले सप्ताह करीब 1 प्रतिशत गिरकर 4,027 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया। साल-दर-साल आधार पर इसमें लगभग 7.8 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। WGC के अनुसार, अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों को स्थिर रखने के फैसले और भविष्य की मौद्रिक नीति को लेकर बदलती उम्मीदों ने भी सोने की कीमतों पर दबाव बनाया है।
इसके अलावा अमेरिका-ईरान तनाव, तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और वैश्विक महंगाई को लेकर बनी अनिश्चितता भी बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा रही है। इसके बावजूद विश्लेषकों का मानना है कि फेडरल रिजर्व की आगामी नीतियां, अमेरिकी आर्थिक आंकड़े और वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रम आगे भी सोने की कीमतों को प्रभावित करते रहेंगे। ऐसे में निवेशकों की नजर अब आने वाले आर्थिक संकेतकों और केंद्रीय बैंक के फैसलों पर बनी रहेगी।
Published at : 04 Aug 2026, 03:17 pm (IST)
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