इन परियोजनाओं का उद्देश्य देश में सेमीकंडक्टर निर्माण को बढ़ावा देना और काशी की यातायात व्यवस्था को आधुनिक बनाना है।
By : Admin User | Updated at : 15 Jul 2026, 05:12 pm (IST)
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को आयोजित केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में देश के विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। इनमें सबसे प्रमुख फैसला सेमीकॉन 2.0 मिशन और वाराणसी में दो विशाल एलिवेटेड कॉरिडोर के निर्माण से जुड़ा रहा। इन योजनाओं का उद्देश्य भारत की तकनीकी क्षमता को मजबूत करना और काशी में आधुनिक परिवहन सुविधाओं का विस्तार करना है।
केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट के फैसलों की जानकारी देते हुए बताया कि सरकार ने 1,27,500 करोड़ रुपये के बजट वाले सेमीकॉन 2.0 मिशन को मंजूरी दे दी है। यह मिशन देश में सेमीकंडक्टर डिजाइन, चिप निर्माण और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
उन्होंने कहा कि आज के समय में सेमीकंडक्टर चिप्स मोबाइल फोन, लैपटॉप, टीवी, रेफ्रिजरेटर, एयर कंडीशनर, ऑटोमोबाइल, रेलवे, मेडिकल उपकरण और रक्षा क्षेत्र तक लगभग हर आधुनिक तकनीक का अहम हिस्सा हैं। ऐसे में भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन में मजबूत स्थान दिलाने के लिए यह मिशन बेहद महत्वपूर्ण होगा।
वाराणसी को मिलेगी नई ट्रैफिक व्यवस्था
पहला प्रोजेक्ट वरुण एक्सप्रेसवे है, जो वरुण नदी के किनारे विकसित किया जाएगा। लगभग 43 किलोमीटर लंबे इस एलिवेटेड कॉरिडोर पर 10,998 करोड़ रुपये की लागत आएगी। इसे हाइब्रिड एन्युइटी मॉडल (HAM) के तहत बनाया जाएगा और अगले चार वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
दूसरा प्रोजेक्ट गंगा एलिवेटेड कॉरिडोर है, जिसकी लंबाई लगभग 46 किलोमीटर होगी। यह कॉरिडोर गंगा नदी के किनारे विकसित किया जाएगा और IIT-BHU, लंका चौक तथा रामनगर को बेहतर कनेक्टिविटी देगा। इस परियोजना में गंगा पर एक आधुनिक सिग्नेचर ब्रिज का भी निर्माण किया जाएगा। इसकी अनुमानित लागत 14,448 करोड़ रुपये तय की गई है।
रोजगार और विकास को मिलेगा बढ़ावा
सरकार का मानना है कि सेमीकॉन 2.0 मिशन से देश में हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग, निवेश और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। वहीं, वाराणसी के दोनों एलिवेटेड कॉरिडोर शहर में ट्रैफिक दबाव कम करने, यात्रा को आसान बनाने और धार्मिक पर्यटन को नई गति देने में अहम भूमिका निभाएंगे।
इन फैसलों को भारत के तकनीकी विकास, बुनियादी ढांचे के विस्तार और 'मेक इन इंडिया' अभियान को मजबूती देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
Published at : 15 Jul 2026, 05:12 pm (IST)
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