सुप्रीम कोर्ट ने जीवन रक्षक दवाओं तक लोगों की पहुंच सुनिश्चित करने के मामले में स्वतः संज्ञान लिया है। केंद्र सरकार और DCGI को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है।
By : Admin User | Updated at : 17 Jul 2026, 05:09 pm (IST)
नई दिल्ली: जीवन रक्षक दवाओं की बढ़ती कीमतों और आम मरीजों की पहुंच सुनिश्चित करने के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए केंद्र सरकार और ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) को नोटिस जारी किया है। अदालत ने इस मामले में जवाब तलब करते हुए संकेत दिया है कि वह संविधान के अनुच्छेद-21 से जुड़े मामलों की त्वरित सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए देशभर में लागू होने वाले दिशा-निर्देश जारी कर सकती है।
यह मामला केरल की एक ब्रेस्ट कैंसर पीड़ित महिला की याचिका से जुड़ा है। एर्नाकुलम निवासी महिला ने वर्ष 2022 में केरल हाई कोर्ट में याचिका दाखिल कर बताया था कि रिबोसिक्लिब (Ribociclib) और एबेमासिक्लिब (Abemaciclib) जैसी जीवन रक्षक दवाओं पर हर महीने करीब 1.5 लाख रुपये खर्च होते हैं, जिन्हें अधिकांश मरीज वहन नहीं कर सकते। याचिका लंबित रहने के दौरान 2022 के अंत में महिला का निधन हो गया।
महिला की मृत्यु के बाद भी केरल हाई कोर्ट ने इस मुद्दे को सार्वजनिक महत्व का मानते हुए स्वतः संज्ञान लिया और मामले की सुनवाई जारी रखी। हालांकि जनवरी 2023 से अब तक यह मामला 57 बार सूचीबद्ध होने के बावजूद किसी ठोस निष्कर्ष तक नहीं पहुंच सका।
इसी देरी को गंभीर मानते हुए सुप्रीम कोर्ट ने मामले को अपने स्तर पर सुनने का फैसला किया है। मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने केरल हाई कोर्ट से भी अनुरोध किया है कि वह लंबित मामले की जल्द सुनवाई कर आदेश पारित करे।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि जीवन रक्षक इलाज से जुड़ी याचिकाओं का फैसला याचिकाकर्ता के जीवनकाल में नहीं हो पाता, तो यह न्याय व्यवस्था के लिए चिंता का विषय है। अदालत अब इस बात पर भी विचार करेगी कि जीवन के अधिकार (अनुच्छेद-21) से जुड़े मामलों की सुनवाई समयबद्ध तरीके से सुनिश्चित करने के लिए क्या देशव्यापी दिशा-निर्देश जारी किए जाएं।
Published at : 17 Jul 2026, 05:09 pm (IST)
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