सरकार ने स्पष्ट किया है कि इसे असली पनीर बताकर बेचना उपभोक्ताओं को गुमराह करना है और ऐसा करने वालों पर खाद्य सुरक्षा कानून के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
By : Admin User | Updated at : 05 Aug 2026, 12:35 pm (IST)
महाराष्ट्र सरकार ने सार्वजनिक स्वास्थ्य की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए एनालॉग (नॉन-डेयरी) पनीर के निर्माण, प्रोसेसिंग, पैकिंग, भंडारण, परिवहन, थोक एवं खुदरा बिक्री और वितरण पर तत्काल प्रभाव से पूर्ण प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है। इस फैसले के साथ महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ के बाद ऐसा कदम उठाने वाला देश का दूसरा राज्य बन गया है।
30 जुलाई को खाद्य सुरक्षा आयुक्त तुकाराम मुंढे द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि राज्य में अब नॉन-डेयरी पनीर से जुड़ी पूरी सप्लाई चेन पर रोक लागू रहेगी। इसका उद्देश्य उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य की रक्षा करना और बाजार में भ्रामक तरीके से बेचे जा रहे उत्पादों पर अंकुश लगाना है।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई व्यापारी या निर्माता एनालॉग पनीर को असली डेयरी पनीर बताकर बेचता है, तो इसे फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट, 2006 के तहत अनुचित व्यापारिक गतिविधि माना जाएगा। ऐसे मामलों में संबंधित व्यक्ति या संस्था के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
नियमों का उल्लंघन करने वालों पर अपराध की गंभीरता के आधार पर 6 महीने तक की जेल और 1 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। वहीं, यदि असुरक्षित खाद्य पदार्थ के सेवन से किसी व्यक्ति की मृत्यु होती है, तो दोषियों को आजीवन कारावास और कम से कम 10 लाख रुपये के जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है।
सरकार का कहना है कि यह फैसला उपभोक्ताओं को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराने तथा खाद्य उत्पादों में पारदर्शिता बनाए रखने के उद्देश्य से लिया गया है। इससे बाजार में नकली या भ्रामक तरीके से बेचे जाने वाले पनीर पर रोक लगेगी और लोगों के स्वास्थ्य की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित हो सकेगी।
Published at : 05 Aug 2026, 10:31 am (IST)