समिति ने चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समय में माफी नहीं दी गई, तो सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 79(3) के तहत मिलने वाली 'सेफ हार्बर' कानूनी सुरक्षा पर पुनर्विचार किया जा सकता है।
By : Admin User | Updated at : 05 Aug 2026, 06:21 pm (IST)
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का वीडियो फेसबुक से हटाए जाने के मामले ने नया मोड़ ले लिया है। बुधवार को मेटा के मुख्य वैश्विक मामलों के अधिकारी जोएल कपलान के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने नई दिल्ली में इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के सचिव एस. कृष्णन से मुलाकात की। करीब 45 मिनट चली इस बैठक में कंपनी ने वीडियो हटने की परिस्थितियों और उसके पीछे की वजहों पर अपना पक्ष रखा।
जानकारी के अनुसार, मेटा के अधिकारी बाद में केंद्रीय सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव से भी मुलाकात करने वाले हैं। हालांकि, जब अधिकारियों से यह पूछा गया कि वीडियो हटाने के लिए जिम्मेदार व्यक्ति कौन था, तो उन्होंने इस पर कोई टिप्पणी नहीं की।
इस बीच संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी से जुड़ी संसदीय स्थायी समिति ने इस मामले को गंभीर बताते हुए मेटा के सीईओ मार्क ज़करबर्ग से तीन दिनों के भीतर बिना शर्त माफी मांगने की मांग की है। समिति ने चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समय में माफी नहीं दी गई, तो सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 79(3) के तहत मिलने वाली 'सेफ हार्बर' कानूनी सुरक्षा पर पुनर्विचार किया जा सकता है।
समिति ने यह भी चिंता जताई कि परीक्षा विवाद और पेपर लीक से जुड़े मुद्दों पर छात्रों को संबोधित करते प्रधानमंत्री का वीडियो कई घंटों तक फेसबुक से गायब रहा। इसके अलावा ऑनलाइन महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा, बाल यौन शोषण सामग्री (CSAM) तथा आपत्तिजनक कंटेंट को लेकर भी डिजिटल प्लेटफॉर्म की जवाबदेही पर जोर दिया गया।
मामले के बीच समिति के अध्यक्ष और भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने दावा किया कि मेटा ने स्वीकार किया है कि प्रधानमंत्री का वीडियो लगभग पांच घंटे तक प्लेटफॉर्म से अनुपलब्ध रहा। फिलहाल पूरे घटनाक्रम को लेकर केंद्र सरकार, संसदीय समिति और डिजिटल प्लेटफॉर्म के बीच आगे की प्रक्रिया पर सभी की नजर बनी हुई है।
Published at : 05 Aug 2026, 06:21 pm (IST)