भारत-अमेरिका प्रस्तावित व्यापार समझौते के विरोध में मंगलवार को दिल्ली के किसान घाट पर किसान महापंचायत आयोजित की जा रही है। सुरक्षा के मद्देनजर शंभू बॉर्डर पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है और कई स्थानों पर बैरिकेडिंग की गई है। किसान संगठनों का आरोप है कि प्रस्तावित ट्रेड डील से भारतीय कृषि, डेयरी और छोटे किसानों की आजीविका पर गंभीर असर पड़ेगा।
By : Admin User | Updated at : 21 Jul 2026, 10:31 am (IST)
भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते (ट्रेड डील) के विरोध में मंगलवार को दिल्ली के किसान घाट पर किसान महापंचायत का आयोजन किया जा रहा है। इस महापंचायत में पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, उत्तराखंड, तेलंगाना, तमिलनाडु और केरल सहित देश के कई राज्यों के किसान संगठनों के प्रतिनिधि हिस्सा लेने के लिए दिल्ली पहुंच रहे हैं।
महापंचायत को देखते हुए हरियाणा सरकार ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। पंजाब-हरियाणा के शंभू बॉर्डर पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। घग्गर नदी के पुल पर बैरिकेडिंग, सीमेंट के ब्लॉक और अन्य अवरोध लगाकर किसानों की आवाजाही रोकने के इंतजाम किए गए हैं। दिल्ली की सीमाओं पर भी अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं।
इस बीच भारतीय किसान यूनियन (चढ़ूनी गुट) के प्रमुख गुरनाम सिंह चढ़ूनी को सोमवार शाम कुरुक्षेत्र में पुलिस ने हिरासत में ले लिया। बताया जा रहा है कि वह अपने समर्थकों के साथ दिल्ली में आयोजित किसान महापंचायत में शामिल होने जा रहे थे। इसके अलावा BKU के प्रवक्ता राकेश बैंस को भी हिरासत में लिए जाने का दावा किया गया है।
किसान नेता सरवन सिंह पंढेर ने कहा कि किसान शांतिपूर्ण तरीके से दिल्ली जाना चाहते हैं, लेकिन हरियाणा सरकार उन्हें शंभू बॉर्डर पर रोक रही है। उन्होंने कहा कि किसान भारत-अमेरिका प्रस्तावित व्यापार समझौते को पूरी तरह रद्द करने की मांग कर रहे हैं। शंभू बॉर्डर पर अन्य किसान नेताओं के साथ बैठक के बाद आगे की रणनीति तय की जाएगी।
हरियाणा के कई इलाकों में किसानों ने विरोध प्रदर्शन भी किया। हिसार-चंडीगढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित टोल प्लाजा पर किसान एकत्र हुए, जबकि अंबाला के पास शंभू टोल प्लाजा पर कुछ समय के लिए जाम की स्थिति भी बनी, जिससे यातायात प्रभावित हुआ।
किसान संगठनों का कहना है कि प्रस्तावित भारत-अमेरिका ट्रेड डील के तहत यदि अमेरिका से सस्ते कृषि और डेयरी उत्पादों के आयात को अनुमति मिलती है, तो इसका सबसे बड़ा नुकसान भारतीय किसानों, पशुपालकों, छोटे व्यापारियों और खेतिहर मजदूरों को उठाना पड़ेगा। उनका दावा है कि इस समझौते से भारतीय कृषि क्षेत्र की प्रतिस्पर्धा कमजोर होगी और लाखों किसानों की आजीविका पर संकट खड़ा हो सकता है।
इसी मांग को लेकर देशभर के किसान संगठनों ने दिल्ली में एकजुट होकर सरकार से प्रस्तावित व्यापार समझौते पर पुनर्विचार करने और किसानों के हितों की रक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।
Published at : 21 Jul 2026, 10:31 am (IST)