टनल में फंसे मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकालने के प्रयास जारी हैं। मीथेन गैस की मौजूदगी के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन बेहद कठिन हो गया है। NDRF, SDRF, पुलिस और अन्य एजेंसियां मौके पर तैनात हैं।
By : Admin User | Updated at : 21 Jul 2026, 11:31 am (IST)
सिक्किम के नामची जिले में निर्माणाधीन सामरदुंग-मामरिंग टनल के बाहर हुए भीषण भूस्खलन ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। इस दर्दनाक हादसे में अब तक 9 शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि सुरंग के भीतर फंसे मजदूरों तक पहुंचने के लिए राहत एवं बचाव अभियान लगातार जारी है। प्रशासन, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF), राज्य आपदा मोचन बल (SDRF), जिला पुलिस, फायर सर्विस और अन्य विशेषज्ञ एजेंसियां युद्धस्तर पर बचाव कार्य में जुटी हुई हैं। हालांकि, टनल के भीतर मौजूद मीथेन गैस, मलबे का भारी दबाव और संकरी सुरंग रेस्क्यू ऑपरेशन को बेहद चुनौतीपूर्ण बना रहे हैं।
भूस्खलन के बाद मलबे में दब गया टनल का प्रवेश द्वार
सोमवार को अचानक हुए भूस्खलन के कारण निर्माणाधीन टनल का प्रवेश मार्ग भारी मात्रा में चट्टानों, मिट्टी और मलबे से पूरी तरह बंद हो गया। इससे सुरंग के भीतर काम कर रहे मजदूर बाहर नहीं निकल सके। हादसे की सूचना मिलते ही इलाके में अफरा-तफरी मच गई और स्थानीय प्रशासन ने तुरंत आपातकालीन राहत अभियान शुरू कर दिया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, भूस्खलन बेहद तेज था और कुछ ही मिनटों में टनल का प्रवेश हिस्सा पूरी तरह मलबे की चपेट में आ गया। इसके बाद निर्माण स्थल पर मौजूद कर्मचारियों ने तुरंत प्रशासन और बचाव एजेंसियों को सूचना दी।
अब तक 9 शव बरामद, अन्य मजदूरों की तलाश जारी
प्रशासन के मुताबिक, हादसे के बाद शुरू किए गए रेस्क्यू अभियान के दौरान अब तक 9 शव बरामद किए जा चुके हैं। वहीं, सुरंग के भीतर फंसे अन्य मजदूरों तक पहुंचने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि राहत कार्य बेहद सावधानी के साथ किया जा रहा है ताकि अंदर फंसे लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि फंसे लोगों की वास्तविक संख्या का सत्यापन अभी जारी है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, सुरंग के भीतर पटेल इंजीनियरिंग और NHPC से जुड़े कर्मचारी कार्य कर रहे थे।
मीथेन गैस बनी सबसे बड़ी चुनौती
रेस्क्यू अभियान के सामने सबसे बड़ी चुनौती टनल के भीतर मौजूद मीथेन गैस है। अधिकारियों के अनुसार, भूस्खलन के बाद जमीन और चट्टानों के खिसकने से गैस का रिसाव होने की आशंका है। यही कारण है कि बचाव दल को अत्यधिक सावधानी के साथ आगे बढ़ना पड़ रहा है।
बताया गया है कि गैस के प्रभाव से कई बचावकर्मियों को चक्कर आने लगे, जबकि कुछ की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें तत्काल बाहर निकालकर प्राथमिक उपचार दिया गया। इसके बाद रेस्क्यू टीमों को गैस मास्क, ऑक्सीजन सिलेंडर और विशेष सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराए गए, ताकि अभियान बिना किसी अतिरिक्त जोखिम के जारी रखा जा सके।
कई एजेंसियां संयुक्त रूप से चला रही हैं राहत अभियान
घटना की सूचना मिलते ही NDRF, SDRF, जिला प्रशासन, पुलिस, फायर सर्विस और तकनीकी विशेषज्ञों की टीमें मौके पर पहुंच गईं। इसके अलावा पश्चिम बंगाल से भी विशेष रेस्क्यू टीम बुलाई गई है, जो गैस प्रभावित क्षेत्रों में बचाव कार्य का अनुभव रखती है।
रेस्क्यू टीम आधुनिक मशीनों, गैस डिटेक्शन उपकरणों, ड्रिलिंग मशीनों और भारी अर्थमूविंग मशीनों की सहायता से मलबा हटाने का कार्य कर रही है। साथ ही सुरंग के भीतर ऑक्सीजन के स्तर और गैस की मात्रा पर लगातार नजर रखी जा रही है।
प्रशासन की पहली प्राथमिकता सुरक्षित रेस्क्यू
नामची जिला प्रशासन ने कहा है कि फिलहाल उनकी पहली और सबसे बड़ी प्राथमिकता टनल में फंसे सभी मजदूरों तक सुरक्षित पहुंचना और उन्हें बाहर निकालना है। इसके बाद पूरे मामले की तकनीकी जांच कराई जाएगी, जिससे यह पता लगाया जा सके कि भूस्खलन किन कारणों से हुआ और भविष्य में ऐसी घटनाओं को कैसे रोका जा सकता है।
अधिकारियों का कहना है कि पहाड़ी इलाकों में लगातार बारिश और कमजोर होती चट्टानों के कारण भूस्खलन का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में निर्माण कार्यों के दौरान अतिरिक्त सुरक्षा उपाय अपनाने की आवश्यकता होती है।
तीस्ता स्टेज-6 हाइड्रोइलेक्ट्रिक परियोजना का हिस्सा है सुरंग
बताया जा रहा है कि यह निर्माणाधीन सुरंग तीस्ता स्टेज-6 हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर प्रोजेक्ट का हिस्सा है। इस परियोजना का निर्माण पटेल इंजीनियरिंग द्वारा NHPC के लिए किया जा रहा है। यह परियोजना क्षेत्र में बिजली उत्पादन क्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से विकसित की जा रही है और इसे रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है।
पूरे देश की नजर रेस्क्यू ऑपरेशन पर
सिक्किम टनल हादसे के बाद पूरे देश की नजर बचाव अभियान पर टिकी हुई है। प्रशासन ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करने की अपील की है। विशेषज्ञों का मानना है कि मीथेन गैस, मलबे की मोटी परत और संकरी सुरंग के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन में समय लग सकता है, लेकिन सभी एजेंसियां समन्वय के साथ लगातार काम कर रही हैं।
फिलहाल राहत एवं बचाव अभियान युद्धस्तर पर जारी है और प्रशासन को उम्मीद है कि जल्द से जल्द फंसे मजदूरों तक पहुंचकर उन्हें सुरक्षित बाहर निकाला जा सकेगा। पूरे देश की प्रार्थनाएं इस अभियान से जुड़ी हुई हैं और सभी की निगाहें रेस्क्यू ऑपरेशन के अगले अपडेट पर टिकी हैं।
Published at : 21 Jul 2026, 11:28 am (IST)